उत्तराखंड की राजनीति में स्थिरता कभी सहज नहीं रही।
राज्य गठन के बाद दो दशकों तक मुख्यमंत्री बदलना लगभग
राजनीतिक नियति बन गया था। ऐसे माहौल में मुख्यमंत्री पुष्कर
सिंह धामी का लगातार पांच वर्ष तक नेतृत्व करना केवल एक
व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उत्तराखंड की राजनीति में
परिपक्वता और प्रशासनिक निरंतरता का भी संकेत है। किसी
भी सरकार का वास्तविक मूल्यांकन केवल उसके कार्यकाल
की अवधि से नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों से होता है जिनका
उसने सामना किया और जिनका समाधान उसने किस प्रकार
निकाला। धामी सरकार के पांच वर्षों का सबसे बड़ा संदेश यही
रहा है कि विकास और सुशासन के साथ-साथ संकट प्रबंधन भी उसकी प्राथमिकताओं में
शामिल रहा। हाल ही में कर्णप्रयाग के नगरास में निहंग श्रद्धालुओं से जुड़े विवाद ने एक बार
फिर यह साबित किया कि संवेदनशील परिस्थितियों में प्रशासन का धैर्य और सरकार की सूझबूझ
कितनी महत्वपूर्ण होती है। यह मामला यदि समय रहते नहीं संभलता तो धार्मिक और
सामाजिक तनाव का रूप ले सकता था। लेकिन सरकार ने संवाद, कानून के निष्पक्ष पालन
और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई के माध्यम से स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से नियंत्रित किया। यह
केवल कानून-व्यवस्था की सफलता नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता को सर्वोच्च प्राथमिकता
देने वाली शासन शैली का भी परिचायक है।
इस वर्ष की चारधाम यात्रा भी सरकार के लिए बड़ी परीक्षा थी। करोड़ों श्रद्धालुओं की बढ़ती
संख्या, पर्वतीय क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और मौसम की अनिश्चितता के बीच
यात्रा को सुचारु बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं था। सड़क, यातायात, स्वास्थ्य, सुरक्षा
और आपदा प्रबंधन के मोर्चे पर लगातार समन्वय ने यह सुनिश्चित किया कि यात्रा अपेक्षाकृत
व्यवस्थित ढंग से संचालित हो। यात्रा के दौरान सामने आई चुनौतियों का समाधान भी तेजी से
किया गया। यह अनुभव केवल वर्तमान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी अर्धकुंभ-
2027 और भविष्य की बड़ी धार्मिक यात्राओं के लिए भी मजबूत आधार बनेगा। देखा जाए
तो धामी सरकार की कार्यशैली का मूल तत्व स्पष्ट दिखाई देता है त्वरित निर्णय, प्रशासनिक
सक्रियता और परिणाम देने की कोशिश यही दृष्टिकोण अन्य क्षेत्रों में भी दिखाई देता है। चाहे
देश का सख्त नकल विरोधी कानून लागू करना हो, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना, समान
नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल करना, धार्मिक पर्यटन और चारधाम
यात्रा के लिए आधारभूत ढांचे का विस्तार करना या सीमांत क्षेत्रों में सड़क और संपर्क सुविधाओं
को मजबूत करना- सरकार ने कई ऐसे निर्णय लिए हैं, जिन्होंने उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर
अलग पहचान दिलाई है। बेशक, चुनौतियां अभी भी कम नहीं हैं। पलायन, युवाओं के लिए
स्थायी रोजगार, पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा की बेहतर व्यवस्था तथा ग्रामीण
अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत बनाना अभी भी सरकार के सामने बड़ी जिम्मेदारियां हैं। पांच
वर्ष पूरे होने के बाद यह कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में
नेतृत्व की एक ऐसी शैली विकसित करने का प्रयास किया है, जिसमें विकास योजनाओं के
साथ संवेदनशील परिस्थितियों में त्वरित निर्णय, सामाजिक संतुलन और प्रशासनिक जवाबदेही
समान रूप से दिखाई देती है।
पांच वर्षों की कसौटी पर धामी नेतृत्व
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